जानिए, थोड़ा-सा जायफल–जावित्री के बारे में

जायफल और जावित्री केवल मिठाइयों की सुगंध बढ़ाने वाले मसाले नहीं हैं। आयुर्वेद में जातिफल को दीपन, ग्राहि और उष्ण गुणों वाला द्रव्य बताया गया है।

रसोई का जीरा भी कितना उपयोगी है!

रसोई में रोज उपयोग होने वाला जीरा आयुर्वेद में केवल मसाला नहीं है। दीपनीय, पाचनीय, रोचन और संग्राही गुणों वाले इस द्रव्य का आयुर्वेद में क्या महत्व है और इसका उचित उपयोग कैसे समझें?

मुखवास के घरेलू औषधीय उपयोग

मुखवास में उपयोग होने वाले अनेक द्रव्यों का आयुर्वेदीय परंपरा में औषधीय महत्व है। सौंफ, हरड़, यष्टिमधु, नागरवेल और आम की गुठली के पारंपरिक उपयोग को सरल भाषा में समझें।

हमेशा हितकारी धनिया

धनिया केवल रसोई का मसाला नहीं है। आयुर्वेद में इसे दीपन, पाचन, रोचक और ग्राहि गुणों वाला द्रव्य बताया गया है। हरे और सूखे धनिया के गुणों में महत्वपूर्ण अंतर भी समझना आवश्यक है।

इलायची — केवल मुखवास या एक औषधीय द्रव्य?

इलायची केवल सुगंधित मुखवास नहीं है। आयुर्वेद में इसके मुखशोधन, दीपनीय, पाचन और कफशामक गुणों के कारण विशेष स्थान है। जानिए इसके पारंपरिक उपयोग और सावधानियां।

हमेशा सेवन करने योग्य धनिया — आयुर्वेद में धान्यक का महत्व

धनिया केवल भोजन का स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं है। आयुर्वेद में धान्यक को पाचन, दाह, तृष्णा, रुचि और मूत्रल गुणों से जोड़ा गया है।

आयुर्वेद के अनुसार आहार की सही मात्रा क्या होनी चाहिए?

🥗 आयुर्वेद के अनुसार आहार की सही मात्रा क्या होनी चाहिए? आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए केवल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम क्या खाते हैं, बल्कि यह भी उतना ही जरूरी है कि हम कितना और कब खाते हैं। गलत मात्रा और गलत समय पर भोजन करने से पाचन शक्ति कमजोर होती है …
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