छींक शरीर की रक्षा प्रक्रिया है, पर दिन में दर्जनों छींकें जीवन कठिन बना देती हैं। आयुर्वेद बार-बार की छींक को क्षवथु के रूप में समझता है, ट्रिगर पहचानना, वात-कफ संतुलन और नस्य द्वारा राहत का मार्ग।
गले का संक्रमण (फैरिंजाइटिस): गले में दर्द-खराश के कारण और आयुर्वेदिक उपचार
गले में खराश लगभग हर किसी को होती है, पर बार-बार हो या लंबी चले तो उसके पीछे एसिडिटी, धूम्रपान, आवाज़ का अधिक उपयोग या कमज़ोर अग्नि हो सकती है। आयुर्वेद कंठ को कफ-पित्त का स्थान मानकर गंडूष, पथ्य और औषधि से देखभाल का मार्ग बताता है।
नाक बंद रहना: कारण, घरेलू देखभाल और आयुर्वेदिक उपचार
रात में मुँह से साँस, सुबह सूखा गला और दिनभर भारी सिर, बंद नाक नींद और जीवन की गुणवत्ता बिगाड़ती है। आयुर्वेद कफ-वात के अवरोध को दूर कर नस्य और दिनचर्या द्वारा मार्ग खोलने का उपाय बताता है।
साँस फूलना (हाँफना): कारण पहचानें, चेतावनी संकेत और आयुर्वेदिक समझ
सीढ़ियाँ चढ़ते हाँफना सामान्य है या चेतावनी? साँस फूलना स्वयं रोग नहीं, बल्कि शरीर का संकेत है। कारण पहचानना, चेतावनी संकेत जानना और आयुर्वेद की अग्नि-प्राण आधारित समझ से सही दिशा में देखभाल करना।
पल्मोनरी फ़ाइब्रोसिस (फेफड़े कड़े होना): लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक सहायक देखभाल
धीरे-धीरे बढ़ती साँस की तकलीफ़ और न जाने वाली सूखी खाँसी, पल्मोनरी फ़ाइब्रोसिस गंभीर और लंबा चलने वाला रोग है। विशेषज्ञ के उपचार के साथ आयुर्वेदिक सहायक देखभाल साँस, शक्ति और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
निमोनिया: लक्षण, चेतावनी संकेत और ठीक होने के बाद आयुर्वेदिक देखभाल
निमोनिया घरेलू उपायों से संभालने का रोग नहीं है, समय पर चिकित्सकीय उपचार जीवन बचाता है। ठीक होने के बाद कमज़ोरी, खाँसी और थकान दूर करने में आयुर्वेदिक पथ्य, रसायन और प्राणायाम मददगार हो सकते हैं।
COPD (फेफड़ों का क्रॉनिक रोग): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक सहायक देखभाल
सीढ़ियाँ चढ़ते हाँफना, सुबह कफ और धीरे-धीरे घटती शक्ति, COPD लंबा चलने वाला रोग है। आयुर्वेदिक सहायक देखभाल, प्राणायाम और पथ्य आधुनिक उपचार के साथ जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं।
एलर्जिक राइनाइटिस (नाक की एलर्जी): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार
सुबह उठते ही छींकों की झड़ी, पानी जैसी नाक और आँखों में खुजली, आयुर्वेद इसे वात-कफ प्रधान प्रतिश्याय के रूप में समझता है और अग्नि, ओज तथा नस्य द्वारा दीर्घकालिक राहत का मार्ग बताता है।
टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल्स): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार
निगलने में दर्द, बुखार और बार-बार टॉन्सिल? आयुर्वेद कफ-पित्त की दुष्टि और मंद अग्नि को मूल कारण मानता है और गंडूष, औषधि तथा पथ्य से बार-बार होने वाले हमलों को कम करने का मार्ग बताता है।
आमवात – रूमेटाइड आर्थराइटिस के लिए आहार-विहार (पथ्य पालन)
(केवल औषधियों से रोग नहीं मिटता, उसके साथ परहेज़ का पालन करने से ही रोग जड़ से मिट सकता है।) आहार बासी भोजन न लें। मैदे की चीज़ें न लें – ब्रेड, बिस्किट, पाव तथा अन्य बेकरी की वस्तुएँ न लें। अचार तथा खमण, ढोकला, हांडवो, इडली, डोसा आदि खमीर उठाकर बनाई जाने वाली वस्तुएँ …
Continue reading आमवात – रूमेटाइड आर्थराइटिस के लिए आहार-विहार (पथ्य पालन)