अतिसार (दस्त), ग्रहणी-संग्रहणी, पुराना मरोड़ (मरडो), IBS, कोलाइटिस, स्प्रू जैसे पेट और आंतों से जुड़े रोगों के लिए नीचे दी गई परहेज़ का पालन करें। आहार: तीखा, नमकीन, खट्टा बहुत कम मात्रा में लें। बासी भोजन न लें। मैदे से बनी वस्तुएं न लें — ब्रेड, बिस्किट, पाव तथा अन्य बेकरी उत्पाद न लें। अचार …
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Author:वैद्य निकुल पटेल
गर्भावस्था में आहार-विहार: क्या करें, क्या न करें
गर्भावस्था में नीचे दी गई सावधानियों और परहेज़ का ध्यान रखना आवश्यक है। आहार-विहार: तीखा, नमकीन, खट्टा बहुत कम मात्रा में लें। मुख्यतः मीठा, स्वादिष्ट, मन को भाने वाला हल्का भोजन लें। भोजन के साथ दूध (संभव हो तो गाय का), आम का रस, नारियल पानी, शीरा (राब) तथा सात्विक, पौष्टिक और जल्दी पचने वाला …
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कब्ज में आहार-विहार की परहेज़ (क्या खाएं, क्या न खाएं)
कब्ज (कब्जियत) के रोगियों को नीचे दिए गए आहार और विहार (जीवनशैली) की परहेज़ अवश्य रखनी चाहिए। लाभदायक आहार (जो लिया जा सकता है): अजमा (अजवाइन के बीज), उड़द, अचार, अदरक (अधिक मात्रा में), इमली, अंगूर, अंजीर, ककड़ी, काली द्राक्ष (अधिक), आम, कोकम, धनिया पत्ती, पत्तागोभी, फूलगोभी, कद्दू, खजूर, खट्टे पेय, चीनी, खिचड़ी, गलका (तुरई …
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पंचकर्म क्या है? आयुर्वेदिक डिटॉक्स चिकित्सा का संपूर्ण परिचय
आयुर्वेद “स्वास्थ्य रक्षा” और “रोगोपचार” का एक संपूर्ण विज्ञान है। यह केवल फांकी, काढ़े या गोलियों द्वारा की जाने वाली औषध चिकित्सा नहीं है, बल्कि वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य, शिरोधारा, रक्तमोक्षण जैसे अनगिनत कर्मों के माध्यम से की जाने वाली एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में दो प्रकार की चिकित्सा पद्धति बताई गई है: …
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अजमोदादि चूर्ण – जोड़ों के दर्द, सायटिका और कमर दर्द की आयुर्वेदिक औषधि
आमवात, संधिवात, रांझण (सायटिका), कटिशूल (कमर दर्द), आमपाचन तथा शरीर में वायु के कारण होने वाले शूल जैसे रोगों के लिए अजमोदादि चूर्ण एक अत्यंत प्रभावी औषधि माना जाता है। बनाने की विधि: यह चूर्ण बनाने के लिए बाजार से निम्नलिखित औषधियां साबुत लाकर, साफ करके, कूटकर और चूर्ण बनाकर इस अनुपात में मिलाएं: अजमोद …
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अर्जुन चूर्ण – हृदय, वजन और अस्थिभंग की आयुर्वेदिक औषधि
बनाने की विधि: अर्जुन के वृक्ष से या पंसारी की दुकान से अर्जुन (साजड़ या सादड़) की छाल लाकर उसे बारीक कूट लें और कपड़े से छानकर बारीक चूर्ण बना लें, फिर इसे एक साफ, सूखी बोतल में भरकर रख लें। सेवन विधि: एक से दस ग्राम तक दिन में दो-तीन बार दूध के साथ …
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गरमालो (आरग्वध / अमलतास) – कब्ज की आयुर्वेदिक औषधि
20 से 30 फुट ऊंचे गरमालो (अमलतास) के वृक्ष की पहचान इसकी गोल, लकड़ी जैसी फलियों से होती है — पकने पर मरून रंग की और कच्ची अवस्था में हरे रंग की, लगभग एक से डेढ़ फुट लंबी और अंगूठे जितनी मोटी — साथ ही इस पर आने वाले झूमर जैसे ताजे पीले फूल भी …
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शिरीष (Albezia lebbeck) – विषघ्न आयुर्वेदिक औषधि
“शिरीषो विषघ्नानाम्” — आचार्य चरक ने भी शिरीष को विषघ्न (विष नाशक) द्रव्य के रूप में वर्णित किया है। दस प्रमुख विषघ्न द्रव्यों में शिरीष को श्रेष्ठ माना गया है। प्राचीन काल से ही विष उतारने के लिए शिरीष का उपयोग होता आया है, और आज भी यह गांवों तथा वनवासी क्षेत्रों में बहुत प्रचलित …
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जटामांसी (Nordostachys Jatamansi) – नाड़ीतंत्र के लिए आयुर्वेदिक औषधि
नदी किनारे उगने वाली, जटा जैसी दिखने वाली घास जैसी जटामांसी को “जटाशंकर” भी कहा जाता है। हिंदी में इसे “बालछड़” और संस्कृत में “जटामांसी” या “मासी” नाम से जाना जाता है। आचार्य चरक ने इसे संज्ञास्थापन (चेतना लाने वाली) औषधियों के वर्ग में शामिल किया है, जिससे इसके महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता …
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सर्पगंधा (Rauwolfia Serpentina) – ब्लड प्रेशर की आयुर्वेदिक औषधि
सर्पगंधा, जिसे वैज्ञानिक नाम Rauwolfia Serpentina से जाना जाता है, आयुर्वेद, एलोपैथी और होम्योपैथी — तीनों पद्धतियों के चिकित्सकों के लिए एक जाना-पहचाना नाम है, और इस पर दुनियाभर में लगातार शोध होते रहे हैं। शायद नीम, हल्दी और आंवला के बाद किसी और औषधि को यह सम्मान बहुत कम मिला है। कहा जाता है …
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