नाक लगातार बंद, गंध न आए और बार-बार साइनस, नाक में मस्से (पॉलिप्स) हो सकते हैं। आयुर्वेद इन्हें नासार्श के रूप में पहचानता है और कफ-वात शमन, नस्य तथा पथ्य द्वारा देखभाल और सर्जरी के बाद पुनरावृत्ति घटाने में सहायक बनता है।
नाक लगातार बंद, गंध न आए और बार-बार साइनस, नाक में मस्से (पॉलिप्स) हो सकते हैं। आयुर्वेद इन्हें नासार्श के रूप में पहचानता है और कफ-वात शमन, नस्य तथा पथ्य द्वारा देखभाल और सर्जरी के बाद पुनरावृत्ति घटाने में सहायक बनता है।