एक बार दर्द वाला मल हो, फिर बच्चा डर से मल रोकता है, मल और सख़्त होता है, यह चक्र कब्ज़ को लंबा बनाता है। ज़्यादातर बाल कब्ज़ आहार, पानी, टॉयलेट की आदत और धैर्य से सुधरती है। आयुर्वेद इसे वात की रूक्षता के रूप में समझता है।
एक बार दर्द वाला मल हो, फिर बच्चा डर से मल रोकता है, मल और सख़्त होता है, यह चक्र कब्ज़ को लंबा बनाता है। ज़्यादातर बाल कब्ज़ आहार, पानी, टॉयलेट की आदत और धैर्य से सुधरती है। आयुर्वेद इसे वात की रूक्षता के रूप में समझता है।