हमेशा सेवन करने योग्य धनिया — आयुर्वेद में धान्यक का महत्व

धनिया केवल भोजन का स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं है। आयुर्वेद में धान्यक को पाचन, दाह, तृष्णा, रुचि और मूत्रल गुणों से जोड़ा गया है।

खाज (Eczema): आयुर्वेद में विचर्चिका, लक्षण, कारण और उपचार

खाज यानी Eczema में खुजली, रूखापन, लालिमा, जलन और कभी-कभी स्राव जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आयुर्वेद में इसके कई लक्षणों का साम्य विचर्चिका से किया जाता है। इसके कारण, दोषों की समझ, आहार-विहार, त्वचा की देखभाल और सुरक्षित आयुर्वेदिक उपचार के बारे में इस लेख में जानें।

मूली किसे खानी चाहिए और किसे नहीं? — आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद में मूली के कोमल, परिपक्व, कच्चे और पके हुए रूपों को अलग-अलग समझाया गया है। जानिए मूली किसे अनुकूल है, किसे सावधानी रखनी चाहिए और इसे किस प्रकार लेना उचित है।

लंबी बीमारी वाले यात्रियों के लिए आयुर्वेदिक Travel Packing List यात्रा के दौरान Chronic Illness हो तो क्या साथ रखें?

लंबी बीमारी वाले व्यक्ति के लिए यात्रा की तैयारी केवल कपड़ों तक सीमित नहीं होती। नियमित दवाएं, medical documents, emergency supplies, सुरक्षित भोजन-पानी और उचित आयुर्वेदिक तैयारी यात्रा को अधिक सुरक्षित बना सकती है।

स्वाइन फ्लू से बचाव: आयुर्वेदिक सलाह और चिकित्सा

हाल ही में हमारे देश के कुछ प्रांतों में महामारी की तरह फैले स्वाइन फ्लू से आप कुछ बातों का ध्यान रखकर स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षा दे सकते हैं। स्वाइन फ्लू मूल रूप से फ्लू का ही एक बहुत तेज़ी से फैलने वाला और जानलेवा भी बन सकने वाला संक्रामक रोग है, …
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सर्दी की देखभाल: ठंड के मौसम में क्या ध्यान रखें (आयुर्वेद)

जय धन्वंतरि! धन्वंतरि त्रयोदशी (धनतेरस) की आपको स्वास्थ्यमय हार्दिक शुभकामनाएं! आयुर्वेद टिप्स: ❄ कश्मीर में हुई भारी बर्फबारी के कारण अचानक शुरू हुई ठंड से जिन्हें सर्दी/खांसी/सांस/एलर्जी की तकलीफ है, तथा आमवात/संधिवात/जोड़ों की समस्या वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। ☸ जिन्हें सर्दी आदि की तकलीफ रहती है, उन्हें …
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जल पान और आयुर्वेद: पानी कितना, कब और कैसा पीना चाहिए

जल ही जीवन है, और जीवन बनाए रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। परंतु पानी कितना पीना चाहिए, कब पीना चाहिए और कैसा पानी पीना चाहिए — यह जानना भी उतना ही ज़रूरी है। पानी न तो अधिक पीना चाहिए और न ही बिल्कुल कम। भगवान ने हमें प्यास इसीलिए दी है ताकि हमें …
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च्यवनप्राश: ताज़े आंवले और लगभग 50 जड़ी-बूटियों से बना संपूर्ण स्वास्थ्य टॉनिक

च्यवनप्राश — एक रसायन: “यत् जरा-व्याधि नाशनम्, तद् रसायनम्” — जो वृद्धावस्था और रोग का नाश करे, उसे रसायन (कायाकल्प करने वाली) औषधि कहते हैं। अर्थात, च्यवनप्राश का नियमित सेवन बुढ़ापे को आने से रोकने में मदद करता है। च्यवनप्राश एक एंटी-एजिंग रसायन के रूप में: यह वृद्धावस्था से जुड़ी कमजोरी दूर करके शक्ति और …
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देवदार (Cedrus Deodara): वजन, बुखार और त्वचा रोगों में आयुर्वेदिक उपयोग

देवों का प्रदेश यानी हिमाचल प्रदेश — हिमालय क्षेत्र में उगने वाला यह देवदार, देवताओं जैसा ही भद्र और देवताओं की ऊंचाई जैसी 200-250 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने वाला यह वृक्ष सचमुच दिव्य है। “भद्रदारु” नाम इसकी कल्याणकारकता और श्रेष्ठता को दर्शाता है। ऊपर से शंकु आकार का दिखने वाला यह 200-250 फीट ऊंचा …
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रास्ना (Pluchea Lanceolata): वात रोगों और जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेद की श्रेष्ठ औषधि

“रास्ना वातहराणाम्” — चरक संहिता, सूत्रस्थान 25। वायु (वात) को दूर करने में रास्ना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। आजकल वायु के रोगों की भरमार है — लगभग हर घर में कोई न कोई व्यक्ति वायु के अस्सी प्रकारों में से किसी एक रोग से पीड़ित मिल ही जाता है। जोड़ों का दर्द इनमें सबसे बड़ी …
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