गले में खराश लगभग हर किसी को होती है, पर बार-बार हो या लंबी चले तो उसके पीछे एसिडिटी, धूम्रपान, आवाज़ का अधिक उपयोग या कमज़ोर अग्नि हो सकती है। आयुर्वेद कंठ को कफ-पित्त का स्थान मानकर गंडूष, पथ्य और औषधि से देखभाल का मार्ग बताता है।
गले में खराश लगभग हर किसी को होती है, पर बार-बार हो या लंबी चले तो उसके पीछे एसिडिटी, धूम्रपान, आवाज़ का अधिक उपयोग या कमज़ोर अग्नि हो सकती है। आयुर्वेद कंठ को कफ-पित्त का स्थान मानकर गंडूष, पथ्य और औषधि से देखभाल का मार्ग बताता है।