English ગુજરાતી आज के आधुनिक युग में गलत खान-पान की आदतों और बैठी हुई जीवनशैली के कारण यूरिक एसिड बढ़ना, जोड़ों का दर्द (गठिया) और त्वचा के रोग सामान्य हो गए हैं। इन समस्याओं के लिए आयुर्वेद में एक अत्यंत प्रभावशाली औषधि बताई गई है, जिसका नाम है ‘कैशोर गुग्गुलु’ (Kaishora Guggulu)। यह केवल एक …
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आयुर्वेद के अनुसार आहार की सही मात्रा क्या होनी चाहिए?
🥗 आयुर्वेद के अनुसार आहार की सही मात्रा क्या होनी चाहिए? आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए केवल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम क्या खाते हैं, बल्कि यह भी उतना ही जरूरी है कि हम कितना और कब खाते हैं। गलत मात्रा और गलत समय पर भोजन करने से पाचन शक्ति कमजोर होती है …
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न्यूराल्जिया (नाड़ी शूल / नाड़ी वेदना) – आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से
न्यूराल्जिया (नाड़ी शूल / नाड़ी वेदना) – आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से परिचय न्यूराल्जिया एक प्रकार का नाड़ी संबंधी तीव्र दर्द (Nerve Pain) है, जिसमें दर्द अचानक, चुभने वाला, या बिजली के झटके जैसा महसूस होता है। यह तब होता है जब कोई नाड़ी (nerve) दब जाती है, सूजन आ जाती है या उसमें विकार होता है। …
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अजवाइन इतनी उपयोगी!
प्रस्तावना रसोई का यह छोटा-सा बीज — अजवाइन — रसोई, मुँह साफ करने या घरेलू औषधि के रूप में सबको परिचित है। इसका प्रयोग तात्कालिक उपचार और पुराने तथा जिद्दी रोगों में बहुत उपयोगी है। यह वातनाशक, दर्दनाशक, कफघ्न और कृमिनाशक है। अजवाइन के घरेलू उपयोग और विधियाँ सिरदर्द / ज़ुकाम सर्दियों और बरसात में …
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अजीर्ण (अपच) क्या है? कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार
English ગુજરાતી अजीर्ण (Ajirna – Indigestion) आज के समय में अजीर्ण (अपच) होना एक बहुत ही सामान्य समस्या बन गई है। आधुनिक और शहरी जीवनशैली अजीर्ण का मुख्य कारण है। आज के युग में शारीरिक श्रम बहुत कम हो गया है, जबकि सुख-सुविधाओं में अत्यधिक वृद्धि हुई है। अनियमित दिनचर्या, भोजन के गलत समय और …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (5)
Embed from Getty Images कब्ज – हर्रे का चूर्ण अपने हिसाब से रात को या सुबह – सुबह में गरम पानी के साथ लेना चाहिये। पीलिया – कोमल मूली खिलाना चाहिये। कर्णरोग – बहरापन, कान से पूय निकलना , कान में आवाज आना, कानमें खुजली होना ऐसे कान के रोगोमें रात को सरसों के तेल …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (4)
Embed from Getty Images खांसी – कटेरी का काढा बनाकर ठंडा होने पर उसमे शहद मिलाकर पीना चाहिये । मूत्रदाह – गर्मी के दिनों में होने वाले पेशाब मे जलने के समय घी, शक्कर के साथ ईलायची का चूर्ण – चन्द्रकला रस की एक गोली के साथ दिन में तीन-चार बार चाटना चाहिये। ऊरःक्षत – …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (3)
Embed from Getty Images आर्तवदोष – मासिकधर्म सही न आने पर, मासिक धर्म देरी से आने पर या कम मात्रा में आने पर १० मिलि मात्रा मे कुमारी आसव दो बार थोडा गरम पानी मिलाकर लेना चाहिए । मिर्गी – शुध्ध किया हुआ सुहागा १ से २ ग्राम शहद के साथ या गर्म जल के …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (2)
Embed from Getty Images अरुचि (खाने में रुचि न होना) – भोजन के समय भूख न लगने पर सैंधा नमक के साथ बिजौरा निम्बू की चटनी बनाकर खाये या अदरख के टुकडो में निम्बू और सैंधा नमक मिलाकर भोजन के पहले लेना रखे। अलसक – पूरानी कब्ज – जहां पर आंतो में पूराना मल आलसी …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (1)
Embed from Getty Images 1. अपचन – हर्रे का ताजा चूर्ण रोज सुबह रातको एक – एक चम्म्च पानी के साथ लेना। 2. दस्त – अतिसार– दस्त होने पर खाना बंध करके, एक एक चम्म्च सोंठ का चूर्ण हर दो घंटे पर छाछ ले साथ मिलाकर पीते रहना चाहिए। उसमें थोडा जीरा भी मिला …
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