आमवात और संधिवात में क्या अंतर है?

आमवात और संधिवात दोनों में जोड़ों का दर्द हो सकता है, लेकिन दोनों की आयुर्वेदिक समझ और उपचार अलग हैं। जानिए दोनों के बीच का अंतर, लक्षण, आहार, पंचकर्म और स्वयं निदान से जुड़ी सावधानियां।

कटि बस्ति: कमर दर्द में आयुर्वेदिक उपचार

कटि बस्ति कमर के निश्चित क्षेत्र में औषधीय स्नेहद्रव्य को कुछ समय तक रखने की आयुर्वेदिक स्थानीय उपचार पद्धति है। जानें इसकी प्रक्रिया, उपयोग, तेल, सावधानियाँ और सीमाएँ।

गर्भधारण से पहले पंचकर्म की आवश्यकता — स्त्री और पुरुष दोनों के लिए आयुर्वेदिक तैयारी

गर्भधारण से पहले पंचकर्म हर दंपती के लिए आवश्यक नहीं है। जानिए उचित व्यक्ति में पंचकर्म, शरीरशुद्धि, स्त्री के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणुओं के स्वास्थ्य तथा आयुर्वेदिक पूर्वतैयारी का महत्व।

नस्य कर्म : नाक के मार्ग से औषधि देने की आयुर्वेदिक पद्धति, लाभ, प्रक्रिया और सावधानियाँ

नस्य कर्म आयुर्वेद की महत्वपूर्ण उपचार पद्धति है। जानिए नस्य क्या है, इसके मुख्य उपचार लाभ, प्रकार, प्रक्रिया, नस्य के बाद की देखभाल और कब नस्य नहीं करना चाहिए।

बस्ति कर्म: आयुर्वेद में बस्ति क्या है, इसके प्रकार, प्रक्रिया, उपयोग और सावधानियां

आयुर्वेद में बस्ति कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। जानें बस्ति क्या है, इसके प्रकार, प्रक्रिया, उपयोग, सावधानियां और किन स्थितियों में इसका विचार किया जा सकता है।

रासायनिक पदार्थों के संपर्क के बाद आयुर्वेदिक दैनिक त्वचा देखभाल

Chemical exposure के बाद होने वाली त्वचा की जलन, सूखापन, लालिमा और संवेदनशीलता को आयुर्वेदिक दृष्टि से समझें तथा दैनिक त्वचा देखभाल के सुरक्षित और व्यावहारिक उपाय जानें।

जानिए, थोड़ा-सा जायफल–जावित्री के बारे में

जायफल और जावित्री केवल मिठाइयों की सुगंध बढ़ाने वाले मसाले नहीं हैं। आयुर्वेद में जातिफल को दीपन, ग्राहि और उष्ण गुणों वाला द्रव्य बताया गया है।

पान-मसाला हानिकारक है? आयुर्वेद में ताम्बूल, सुपारी और पान के बारे में क्या कहा गया है?

नागरवेल का पान, पारंपरिक ताम्बूल और आधुनिक पान-मसाला एक समान नहीं हैं। आयुर्वेदीय ग्रंथों के आधार पर ताम्बूल के गुण, निषेध, मात्रा और उचित उपयोग को समझें।

रसोई का जीरा भी कितना उपयोगी है!

रसोई में रोज उपयोग होने वाला जीरा आयुर्वेद में केवल मसाला नहीं है। दीपनीय, पाचनीय, रोचन और संग्राही गुणों वाले इस द्रव्य का आयुर्वेद में क्या महत्व है और इसका उचित उपयोग कैसे समझें?

मुखवास के घरेलू औषधीय उपयोग

मुखवास में उपयोग होने वाले अनेक द्रव्यों का आयुर्वेदीय परंपरा में औषधीय महत्व है। सौंफ, हरड़, यष्टिमधु, नागरवेल और आम की गुठली के पारंपरिक उपयोग को सरल भाषा में समझें।