हमेशा हितकारी धनिया

धनिया केवल रसोई का मसाला नहीं है। आयुर्वेद में इसे दीपन, पाचन, रोचक और ग्राहि गुणों वाला द्रव्य बताया गया है। हरे और सूखे धनिया के गुणों में महत्वपूर्ण अंतर भी समझना आवश्यक है।

एवस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis) क्या है?

Avascular Necrosis (AVN) में हड्डी के किसी हिस्से में रक्त आपूर्ति कम होने से हड्डी को नुकसान हो सकता है। जानिए AVN के कारण, MRI का महत्व और अस्थि-मज्जा आधारित आयुर्वेदिक दृष्टिकोण।

क्या रात में दही खाना उचित है?

क्या रात में दही खाना सही है? चरक और सुश्रुत संहिता के संदर्भ में जानिए रात में दही से बचने का कारण, दही के गुण और इसके उचित सेवन की आयुर्वेदिक समझ।

शरद ऋतुचर्या: आज के समय में आयुर्वेद के अनुसार कैसे अपनाएँ?

शरद ऋतु में आयुर्वेद पित्त के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए हल्के और पित्त के अनुकूल आहार, नियमित नींद और संतुलित दैनिक जीवनशैली का महत्व बताता है।

इलायची — केवल मुखवास या एक औषधीय द्रव्य?

इलायची केवल सुगंधित मुखवास नहीं है। आयुर्वेद में इसके मुखशोधन, दीपनीय, पाचन और कफशामक गुणों के कारण विशेष स्थान है। जानिए इसके पारंपरिक उपयोग और सावधानियां।

आषाढ़ महीने में अदरक खाए, उसे रोग न सताए — आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद में वर्षा ऋतु के दौरान अग्नि और वातदोष की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आहार-विहार अपनाने की सलाह दी जाती है। जानें आषाढ़ में अदरक के सेवन का महत्व और सही तरीका।

हाइपरथायरॉइडिज्म क्या है? लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

हाइपरथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन अधिक बनने लगते हैं। जानिए इसके प्रमुख लक्षण, कारण, जांच और गलगण्ड के शास्त्रीय आयुर्वेदिक संदर्भ।

Hypothyroidism और आयुर्वेद: गलगंड, अग्नि और कफ-वात की समझ

Hypothyroidism का सीधा वर्णन शास्त्रीय आयुर्वेद में नहीं मिलता। गलगंड, अग्निमांद्य, कफ और मेदधातु जैसे आयुर्वेदीय सिद्धांतों से इसकी स्थिति समझने का दृष्टिकोण जानें।

हमेशा सेवन करने योग्य धनिया — आयुर्वेद में धान्यक का महत्व

धनिया केवल भोजन का स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं है। आयुर्वेद में धान्यक को पाचन, दाह, तृष्णा, रुचि और मूत्रल गुणों से जोड़ा गया है।

मूली किसे खानी चाहिए और किसे नहीं? — आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद में मूली के कोमल, परिपक्व, कच्चे और पके हुए रूपों को अलग-अलग समझाया गया है। जानिए मूली किसे अनुकूल है, किसे सावधानी रखनी चाहिए और इसे किस प्रकार लेना उचित है।