जल पान और आयुर्वेद: पानी कितना, कब और कैसा पीना चाहिए

जल ही जीवन है, और जीवन बनाए रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। परंतु पानी कितना पीना चाहिए, कब पीना चाहिए और कैसा पानी पीना चाहिए — यह जानना भी उतना ही ज़रूरी है। पानी न तो अधिक पीना चाहिए और न ही बिल्कुल कम। भगवान ने हमें प्यास इसीलिए दी है ताकि हमें …
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च्यवनप्राश: ताज़े आंवले और लगभग 50 जड़ी-बूटियों से बना संपूर्ण स्वास्थ्य टॉनिक

च्यवनप्राश — एक रसायन: “यत् जरा-व्याधि नाशनम्, तद् रसायनम्” — जो वृद्धावस्था और रोग का नाश करे, उसे रसायन (कायाकल्प करने वाली) औषधि कहते हैं। अर्थात, च्यवनप्राश का नियमित सेवन बुढ़ापे को आने से रोकने में मदद करता है। च्यवनप्राश एक एंटी-एजिंग रसायन के रूप में: यह वृद्धावस्था से जुड़ी कमजोरी दूर करके शक्ति और …
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देवदार (Cedrus Deodara): वजन, बुखार और त्वचा रोगों में आयुर्वेदिक उपयोग

देवों का प्रदेश यानी हिमाचल प्रदेश — हिमालय क्षेत्र में उगने वाला यह देवदार, देवताओं जैसा ही भद्र और देवताओं की ऊंचाई जैसी 200-250 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने वाला यह वृक्ष सचमुच दिव्य है। “भद्रदारु” नाम इसकी कल्याणकारकता और श्रेष्ठता को दर्शाता है। ऊपर से शंकु आकार का दिखने वाला यह 200-250 फीट ऊंचा …
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रास्ना (Pluchea Lanceolata): वात रोगों और जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेद की श्रेष्ठ औषधि

“रास्ना वातहराणाम्” — चरक संहिता, सूत्रस्थान 25। वायु (वात) को दूर करने में रास्ना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। आजकल वायु के रोगों की भरमार है — लगभग हर घर में कोई न कोई व्यक्ति वायु के अस्सी प्रकारों में से किसी एक रोग से पीड़ित मिल ही जाता है। जोड़ों का दर्द इनमें सबसे बड़ी …
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संग्रहणी, अतिसार, IBS और पुराने मरोड़ में परहेज़ (आयुर्वेद)

अतिसार (दस्त), ग्रहणी-संग्रहणी, पुराना मरोड़ (मरडो), IBS, कोलाइटिस, स्प्रू जैसे पेट और आंतों से जुड़े रोगों के लिए नीचे दी गई परहेज़ का पालन करें। आहार: तीखा, नमकीन, खट्टा बहुत कम मात्रा में लें। बासी भोजन न लें। मैदे से बनी वस्तुएं न लें — ब्रेड, बिस्किट, पाव तथा अन्य बेकरी उत्पाद न लें। अचार …
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गर्भावस्था में आहार-विहार: क्या करें, क्या न करें

गर्भावस्था में नीचे दी गई सावधानियों और परहेज़ का ध्यान रखना आवश्यक है। आहार-विहार: तीखा, नमकीन, खट्टा बहुत कम मात्रा में लें। मुख्यतः मीठा, स्वादिष्ट, मन को भाने वाला हल्का भोजन लें। भोजन के साथ दूध (संभव हो तो गाय का), आम का रस, नारियल पानी, शीरा (राब) तथा सात्विक, पौष्टिक और जल्दी पचने वाला …
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कब्ज में आहार-विहार की परहेज़ (क्या खाएं, क्या न खाएं)

कब्ज (कब्जियत) के रोगियों को नीचे दिए गए आहार और विहार (जीवनशैली) की परहेज़ अवश्य रखनी चाहिए। लाभदायक आहार (जो लिया जा सकता है): अजमा (अजवाइन के बीज), उड़द, अचार, अदरक (अधिक मात्रा में), इमली, अंगूर, अंजीर, ककड़ी, काली द्राक्ष (अधिक), आम, कोकम, धनिया पत्ती, पत्तागोभी, फूलगोभी, कद्दू, खजूर, खट्टे पेय, चीनी, खिचड़ी, गलका (तुरई …
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पंचकर्म क्या है? आयुर्वेदिक डिटॉक्स चिकित्सा का संपूर्ण परिचय

आयुर्वेद “स्वास्थ्य रक्षा” और “रोगोपचार” का एक संपूर्ण विज्ञान है। यह केवल फांकी, काढ़े या गोलियों द्वारा की जाने वाली औषध चिकित्सा नहीं है, बल्कि वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य, शिरोधारा, रक्तमोक्षण जैसे अनगिनत कर्मों के माध्यम से की जाने वाली एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में दो प्रकार की चिकित्सा पद्धति बताई गई है: …
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अजमोदादि चूर्ण – जोड़ों के दर्द, सायटिका और कमर दर्द की आयुर्वेदिक औषधि

आमवात, संधिवात, रांझण (सायटिका), कटिशूल (कमर दर्द), आमपाचन तथा शरीर में वायु के कारण होने वाले शूल जैसे रोगों के लिए अजमोदादि चूर्ण एक अत्यंत प्रभावी औषधि माना जाता है। बनाने की विधि: यह चूर्ण बनाने के लिए बाजार से निम्नलिखित औषधियां साबुत लाकर, साफ करके, कूटकर और चूर्ण बनाकर इस अनुपात में मिलाएं: अजमोद …
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अर्जुन चूर्ण – हृदय, वजन और अस्थिभंग की आयुर्वेदिक औषधि

बनाने की विधि: अर्जुन के वृक्ष से या पंसारी की दुकान से अर्जुन (साजड़ या सादड़) की छाल लाकर उसे बारीक कूट लें और कपड़े से छानकर बारीक चूर्ण बना लें, फिर इसे एक साफ, सूखी बोतल में भरकर रख लें। सेवन विधि: एक से दस ग्राम तक दिन में दो-तीन बार दूध के साथ …
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