आयुर्वेद में रक्तातिसार का अर्थ

रक्तातिसार अतिसार की वह अवस्था है जिसमें मल के साथ रक्त आता है। जानिए आयुर्वेद में इसके कारण, लक्षण, संप्राप्ति, आहार और शास्त्रीय चिकित्सा को सरल भाषा में।

शिरोधारा: क्या है, कैसे की जाती है, कौन-से द्रव्य उपयोग होते हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

शिरोधारा आयुर्वेद की प्रसिद्ध बाह्य उपचार पद्धति है। जानें शिरोधारा क्या है, कैसे की जाती है, कौन-से द्रव्य चुने जाते हैं और नींद व तनाव में इसकी क्या भूमिका हो सकती है।

कटि बस्ति: कमर दर्द में आयुर्वेदिक उपचार

कटि बस्ति कमर के निश्चित क्षेत्र में औषधीय स्नेहद्रव्य को कुछ समय तक रखने की आयुर्वेदिक स्थानीय उपचार पद्धति है। जानें इसकी प्रक्रिया, उपयोग, तेल, सावधानियाँ और सीमाएँ।

बस्ति कर्म: आयुर्वेद में बस्ति क्या है, इसके प्रकार, प्रक्रिया, उपयोग और सावधानियां

आयुर्वेद में बस्ति कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। जानें बस्ति क्या है, इसके प्रकार, प्रक्रिया, उपयोग, सावधानियां और किन स्थितियों में इसका विचार किया जा सकता है।

खाज (Eczema): आयुर्वेद में विचर्चिका, लक्षण, कारण और उपचार

खाज यानी Eczema में खुजली, रूखापन, लालिमा, जलन और कभी-कभी स्राव जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आयुर्वेद में इसके कई लक्षणों का साम्य विचर्चिका से किया जाता है। इसके कारण, दोषों की समझ, आहार-विहार, त्वचा की देखभाल और सुरक्षित आयुर्वेदिक उपचार के बारे में इस लेख में जानें।