संग्रहणी, अतिसार, IBS और पुराने मरोड़ में परहेज़ (आयुर्वेद)

संग्रहणी, अतिसार, IBS और पुराने मरोड़ में परहेज़ (आयुर्वेद)

संग्रहणी, अतिसार, IBS और पुराने मरोड़ में परहेज़ (आयुर्वेद)

मुख्य बातें

  • दस्त, ग्रहणी (संग्रहणी), IBS और लंबी पेचिश में आहार का अनुशासन ठीक होने का मुख्य भाग है।
  • तीखा, नमकीन, खट्टा कम करें, और बासी भोजन, मैदा, बेकरी और खमीर वाली चीजें न लें।
  • छाछ लाभदायक है, जबकि विरुद्ध आहार से बचें।
  • मल में खून, वजन घटना, पानी की कमी या लगातार दस्त में डॉक्टर की जाँच जरूरी है।

अतिसार (दस्त), ग्रहणी-संग्रहणी, पुराना मरोड़ (मरडो), IBS, कोलाइटिस, स्प्रू जैसे पेट और आंतों से जुड़े रोगों के लिए नीचे दी गई परहेज़ का पालन करें।

आहार:

  • तीखा, नमकीन, खट्टा बहुत कम मात्रा में लें।
  • बासी भोजन न लें।
  • मैदे से बनी वस्तुएं न लें, ब्रेड, बिस्किट, पाव तथा अन्य बेकरी उत्पाद न लें।
  • अचार तथा खमण, ढोकला, हांडवो, इडली, डोसा जैसी खमीर से बनी वस्तुएं न लें।
  • छाछ नियमित रूप से लें।
  • दिन में न सोएं।

पीने का पानी उबालने की विधि:

सुबह से शाम तक जितने पानी की आवश्यकता हो, उससे दोगुना पानी लेकर बर्तन खुला रखकर तब तक उबालें जब तक वह आधा न रह जाए। उबालते समय उसमें सोंठ का एक छोटा टुकड़ा डालें। पानी आधा रह जाने पर उसे ठंडा करके उपयोग में लें। शाम से सुबह तक जितने पानी की आवश्यकता हो, उसे शाम को फिर से उसी तरह उबालें। बासी उबला हुआ पानी उपयोग में न लें।

विरुद्ध आहार (असंगत भोजन संयोजन):

  • विरुद्ध आहार अधिकांश रोगों का कारण बनता है, इसलिए इससे दूर रहना चाहिए।
  • दूध के साथ कोई भी फल, दही, छाछ, लहसुन, प्याज़, मूली, गुड़ तथा सभी खट्टी चीज़ें विरुद्ध आहार हैं। दही के साथ गुड़ या मूली लेना भी विरुद्ध आहार है।
  • बाहर के नाश्ते से दूर रहें।
  • यहां से दी जाने वाली सभी दवाएं किसी भी अन्य दवा के साथ लेने में कोई बाधा नहीं डालतीं, इसलिए किसी अन्य उपचार की आवश्यकता होने पर भी इस दवा को बंद रखने की ज़रूरत नहीं है।
  • एक भी दिन चूके बिना नियमित दवा लें।
  • भोजन के तुरंत बाद न लेटें, सौ कदम चलें और यदि संभव हो तो पांच मिनट वज्रासन में बैठें।
  • सुबह नियमित रूप से प्राणायाम और सूर्यनमस्कार करें।
  • भोजन के बाद ली जाने वाली दवा के अलावा बाकी सभी दवाएं किसी भी समय, खाली पेट भी ली जा सकती हैं, इनसे कोई नुकसान नहीं होगा। सभी दवाएं एक साथ या थोड़े-थोड़े अंतराल पर बारी-बारी से भी ली जा सकती हैं।
  • फ्रिज का ठंडा पानी न पिएं और फ्रिज में रखी वस्तुएं न लें।
  • अनार, सेब, मोसंबी, अनानास जैसे फल लिए जा सकते हैं।
  • भूख लगने पर थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।
  • मुरमुरे (ममरा), खाखरा, पतली फुल्का रोटी जैसा हल्का भोजन रखें।

निश्चित परिणाम के लिए आप प्रत्यक्ष या ऑनलाइन परामर्श लेकर हमारे यहां बनी गुणवत्तायुक्त दवाइयां मंगवाकर भी उपचार प्राप्त कर सकते हैं।

संग्रहणी, अतिसार या पुराने मरोड़ में आहार में क्या नहीं लेना चाहिए?

तीखा, नमकीन, खट्टा भोजन, बासी भोजन, मैदे से बनी वस्तुएं, बेकरी उत्पाद, अचार और खमीर से बनी वस्तुएं (ढोकला, इडली, डोसा) नहीं लेनी चाहिए, जबकि छाछ नियमित रूप से लेनी चाहिए।

इन रोगों में पीने का पानी कैसे उबालना चाहिए?

आवश्यक पानी से दोगुना पानी लेकर, बर्तन खुला रखकर सोंठ के टुकड़े के साथ आधा रह जाने तक उबालें, ठंडा करके पिएं; बासी उबला हुआ पानी कभी उपयोग न करें।

दवा लेने का सही तरीका क्या है?

एक भी दिन चूके बिना नियमित रूप से दवा लें; भोजन के बाद ली जाने वाली दवा के अलावा बाकी दवाएं खाली पेट भी ली जा सकती हैं।

इस स्थिति में कैसी जीवनशैली रखनी चाहिए?

भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें, सौ कदम चलें, संभव हो तो पांच मिनट वज्रासन में बैठें, और सुबह नियमित रूप से प्राणायाम व सूर्यनमस्कार करें।

VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
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अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
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महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।

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