गर्भावस्था में नीचे दी गई सावधानियों और परहेज़ का ध्यान रखना आवश्यक है।
आहार-विहार:
- तीखा, नमकीन, खट्टा बहुत कम मात्रा में लें।
- मुख्यतः मीठा, स्वादिष्ट, मन को भाने वाला हल्का भोजन लें। भोजन के साथ दूध (संभव हो तो गाय का), आम का रस, नारियल पानी, शीरा (राब) तथा सात्विक, पौष्टिक और जल्दी पचने वाला भोजन लें।
- उपवास या एक समय भोजन (एकाशन) न करें।
- एक साथ अधिक न खाकर, थोड़ा-थोड़ा करके बार-बार खाएं।
- चाय-कॉफी तथा अन्य किसी भी नशे की आदत से दूर रहें।
- वायु करने वाले वाल, मटर, पापड़ी, चोला, चना, आलू अधिक मात्रा में न लें। अधिक तीखा, नमकीन, खट्टा, तला हुआ, खमीर उठाया भोजन न लें।
- दही, फ्रिज का ठंडा पानी, फ्रिज में रखी वस्तुएं न लें। हमेशा ताज़ा भोजन ही करें।
- फल तथा दूध से बनी वस्तुएं अधिक मात्रा में लें।
- आराम करें। वजन न उठाएं, यात्रा न करें, अधिक परिश्रम न करें।
- पवित्र और स्वच्छ वस्त्र पहनें। नियमित रूप से पूजा-प्रार्थना और सत्संग में व्यस्त रहें।
- शोरगुल, झगड़े जैसी ऊंची आवाज़ वाली जगहों से दूर रहें।
- अच्छा बोलें, अच्छा सुनें, अच्छा देखें और अच्छा सोचें।
- निर्धारित दवा नियमित रूप से लें।
- देर रात तक न जागें। संयम रखें। कठोर बिस्तर या ज़मीन पर बिस्तर लगाकर न सोएं।
- दुर्गंधयुक्त स्थानों से दूर रहें।
- गुस्सा, चिंता या शोक न करें। हमेशा प्रसन्न रहें।
- अपने बच्चे को जैसा बनाना चाहती हैं, उसी के अनुसार मन को तैयार करें और उसी प्रकार का वाचन-मनन-चिंतन रखें (गर्भ संस्कार का सार यही है)।
- बासी भोजन न लें। मैदे से बनी वस्तुएं जैसे ब्रेड, बिस्किट, पाव तथा अन्य बेकरी उत्पाद न लें।
- अचार तथा खमण, ढोकला, हांडवो, इडली, डोसा जैसी खमीर से बनी वस्तुएं न लें।
- दही, छाछ, नींबू, टमाटर, इमली, कोकम आदि सभी खट्टी चीज़ें पूरी तरह बंद करें।
- खाने के सोडे वाली वस्तुएं जैसे गांठिया, फाफड़ा, खमण, भजिया तथा अन्य फरसाण न लें। पीने का सोडा और ठंडे पेय पदार्थों से दूर रहें।
- बाहर के नाश्ते से दूर रहें।
विरुद्ध आहार (असंगत भोजन संयोजन):
विरुद्ध आहार अधिकांश रोगों का कारण बनता है, इसलिए इससे दूर रहना चाहिए। दूध के साथ कोई भी फल, दही, लहसुन, प्याज़, मूली, गुड़ तथा सभी खट्टी चीज़ें विरुद्ध आहार हैं। दही के साथ गुड़ या मूली लेना भी विरुद्ध आहार है। दही वजन बढ़ाने वाला और शरीर की सभी नलिकाओं (स्रोतों) में अवरोध उत्पन्न करने वाला होता है, इसलिए अस्वस्थ व्यक्ति को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। एक भी दिन चूके बिना नियमित दवा लें।
निश्चित परिणाम के लिए आप प्रत्यक्ष या ऑनलाइन परामर्श लेकर हमारे यहां बनी गुणवत्तायुक्त दवाइयां मंगवाकर भी उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
गर्भावस्था में कैसा आहार लेना चाहिए?
मीठा, स्वादिष्ट और हल्का भोजन लेना चाहिए; दूध (संभव हो तो गाय का), आम का रस, नारियल पानी और शीरा जैसी सात्विक-पौष्टिक वस्तुएं थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार लेनी चाहिए।
गर्भावस्था में क्या नहीं लेना चाहिए?
अधिक तीखा, नमकीन, खट्टा या तला हुआ भोजन; वायु करने वाली दालें (वाल, मटर, चना); दही; फ्रिज की वस्तुएं; तथा चाय, कॉफी या अन्य नशे से दूर रहना चाहिए।
गर्भावस्था में कैसी जीवनशैली और विहार रखना चाहिए?
आराम करें, वजन न उठाएं, अधिक यात्रा या परिश्रम से बचें, तथा देर रात तक जागने और कठोर बिस्तर पर सोने से बचें।
गर्भावस्था में मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्या सुझाव है?
अच्छा बोलें, अच्छा सुनें, अच्छा देखें और अच्छा सोचें; गुस्सा, चिंता और शोक से बचकर हमेशा प्रसन्न रहें, और अपने बच्चे के बारे में सकारात्मक विचार-वाचन रखें (गर्भ संस्कार)।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
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