एसिडिटी (अम्लपित्त): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

मुख्य बातें

  • अम्लपित्त (एसिडिटी) अनियमित आहार, देर रात जागना, मानसिक तनाव और पित्त बढ़ाने वाली आदतों से जुड़ा है।
  • पेट और सीने में जलन, खट्टी डकार, सिरदर्द और नींद न आना मुख्य लक्षण हैं।
  • पथ्य-अपथ्य, उचित पंचकर्म, योग और प्राणायाम दोबारा होने से रोकने में सहायक हैं।
  • एसिड या दर्द की दवा खुद रोज न लें; लंबा दर्द, उल्टी या काला मल हो तो डॉक्टर।

कारण

  • आहार-विहार के नियमों का उल्लंघन
  • मानसिक तनाव
  • रात को देर तक जागना
  • अधिक तीखा-तला हुआ और फरसाण (नमकीन) खाने की आदत
  • बासी भोजन
  • अत्यधिक एलोपैथिक दवाओं का सेवन

लक्षण

  • पेट में जलन
  • छाती में जलन
  • सिरदर्द
  • अक्सर गले में जलन
  • खट्टी-तीखी डकारें
  • उल्टी होना
  • नींद न आना
  • दर्द निवारक दवा से भी सिरदर्द ठीक न होना
  • चक्कर आना और आंखों के आगे अंधेरा छाना
  • भूखे न रह पाना

सामान्यतः इस प्रकार की तकलीफ में स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, और गर्मी के मौसम तथा शरद ऋतु में यह तकलीफ बढ़ जाती है। सिरदर्द अत्यंत तीव्र होता है और उल्टी या दस्त होने पर राहत महसूस होती है। कमज़ोरी में भी यह तकलीफ बढ़ जाती है।

बार-बार होने वाली इस एसिडिटी की तकलीफ में कई लोगों को एसिड कम करने वाली दवाएं चना-मुरमुरे की तरह खाने की आदत होती है; उन्हें एक बार इन दवाओं को लेने की सही विधि और इनसे दीर्घकाल में होने वाले दुष्प्रभावों का अध्ययन कर लेना चाहिए।

बार-बार पित्त के कारण होने वाले सिरदर्द में ली जाने वाली दर्द निवारक गोली तत्काल राहत तो अवश्य देती है, परंतु यह पित्त में निश्चित रूप से वृद्धि करती है। जो व्यक्ति रोग को जड़ से मिटाना चाहते हैं, उन्हें यह उपाय बंद करके तुरंत आयुर्वेद पद्धति का सहारा लेकर रोगमुक्त बनना चाहिए।

अपथ्य (परहेज़)

  • नमकीन, खट्टा, तीखा न खाएं।
  • दही, अधिक नमक, उड़द, टमाटर, खट्टी कैरी, छाछ, खट्टे पेय, फरसाण आदि बंद करें।
  • अचार और खमीरी, बेकरी की वस्तुएं तथा बासी भोजन न लें।
  • रात को देर तक न जागें।
  • नियमित रूप से समय पर भोजन करें।
  • चिंता-गुस्सा इस रोग को बढ़ाने वाले हैं, इसलिए इनका त्याग करें।
  • आइसक्रीम तुरंत राहत तो देगी, लेकिन मूल रूप से रोग को बढ़ाएगी।

पथ्य (लाभदायक भोजन)

  • विशेष रूप से दूध, घी, आंवला, शक्कर/मिश्री, गेहूं, कद्दू, तांदलजा (चौलाई का साग), परवल, काली द्राक्ष, चीकू, केले आदि लें।
  • प्रतिदिन रात को त्रिफला, ब्राह्मी, आंवला या शक्कर का चूर्ण अथवा हरड़े का चूर्ण लें।
  • गुलकंद और आंवले का मुरब्बा नियमित रूप से लिया जा सकता है।

औषधियां

निम्नलिखित औषधियों में से सलाह अनुसार ली जा सकती हैं:

  • अविपत्तिकर चूर्ण
  • सूतशेखर रस
  • पथ्यादि क्वाथ
  • कामदुधा रस
  • शतावरी चूर्ण शक्कर वाले दूध के साथ
  • शतावरी घृत
  • चंद्रकला रस

पंचकर्म

इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित पंचकर्म चिकित्सा भी अत्यंत लाभदायक है:

रोग ठीक होने के बाद उसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए योगासन और प्राणायाम आवश्यक हैं।

एसिडिटी (अम्लपित्त) होने के मुख्य कारण क्या हैं?

आहार-विहार के नियमों का उल्लंघन, मानसिक तनाव, रात को देर तक जागना, अधिक तीखा-तला भोजन करने की आदत, बासी भोजन और अत्यधिक एलोपैथिक दवाओं का सेवन एसिडिटी के मुख्य कारण हैं।

एसिडिटी के लक्षण क्या हैं?

पेट और छाती में जलन, सिरदर्द, खट्टी-तीखी डकारें, उल्टी, नींद न आना और चक्कर आना सामान्य लक्षण हैं।

लंबे समय तक एसिडिटी की दवाएं लेना कितना सुरक्षित है?

ऐसी दवाओं का रोज़ाना उपयोग सही विधि और इनके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को समझे बिना नहीं करना चाहिए — इस बारे में विशेषज्ञ वैद्य या डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।

एसिडिटी में आयुर्वेदिक उपचार के रूप में क्या लिया जा सकता है?

अविपत्तिकर चूर्ण, सूतशेखर रस, कामदुधा रस और शतावरी चूर्ण जैसी औषधियां सलाह अनुसार ली जा सकती हैं, और आवश्यकता हो तो विरेचन कर्म या शिरोधारा जैसी पंचकर्म चिकित्सा भी लाभदायक है।

VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
Atharva Ayurveda Clinic Logo
अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
📍 क्लिनिक का Location — Google Maps

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।

Keep Reading

PreviousNext