जल पान और आयुर्वेद: पानी कितना, कब और कैसा पीना चाहिए

जल पान और आयुर्वेद: पानी कितना, कब और कैसा पीना चाहिए

जल पान और आयुर्वेद: पानी कितना, कब और कैसा पीना चाहिए

मुख्य बातें

  • प्यास के अनुसार पानी पिएँ; न बहुत अधिक, न बहुत कम।
  • भोजन से ठीक पहले या बाद अधिक पानी पाचन मंद करता है; भोजन के बीच घूँट-घूँट पानी बेहतर है।
  • बासी, ठहरा या बहुत ठंडा पानी न पिएँ; बीमारी में उबालकर ठंडा किया पानी बेहतर है।
  • सूजन, हृदय या किडनी की समस्या में पानी कितना पिएँ, यह डॉक्टर की सलाह से।

जल ही जीवन है, और जीवन बनाए रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। परंतु पानी कितना पीना चाहिए, कब पीना चाहिए और कैसा पानी पीना चाहिए, यह जानना भी उतना ही ज़रूरी है।

  • पानी न तो अधिक पीना चाहिए और न ही बिल्कुल कम। भगवान ने हमें प्यास इसीलिए दी है ताकि हमें शरीर में पानी की आवश्यकता का एहसास हो सके।
  • पानी शीतल होता है, इसलिए गर्मी के मौसम में, गर्म प्रकृति वाले लोगों के लिए, तथा गर्मी से होने वाले रोगों में पानी अधिक लाभदायक होता है।
  • भोजन से पहले या तुरंत बाद अधिक पानी पीने से जठराग्नि मंद पड़ती है।
  • भोजन करते समय बीच-बीच में थोड़ा पानी पीना बहुत गुणकारी है।
  • परिश्रम या व्यायाम के तुरंत बाद खाली पेट पानी नहीं पीना चाहिए।
  • सर्दी, बुखार, सूजन, जलोदर, अधिक पेशाब आना, या मंदाग्नि जैसी स्थितियों में अधिक पानी नहीं पीना चाहिए।
  • अशुद्ध, जूठा, बंद रखा हुआ, बासी या अत्यधिक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए।
  • बीमारी में उबालकर हल्का किया हुआ पानी पीना चाहिए।
  • विशेषकर शरद और वसंत ऋतु में उबाला हुआ पानी पीने से स्वास्थ्य बना रहता है।
  • सुबह उठते ही खाली पेट अधिक मात्रा में पानी पीने से पेट तो साफ हो जाता है, परंतु यह पाचक रसों को भी बहा देता है और चर्बी-सूजन बढ़ा सकता है।
  • प्यास के वेग को रोकना नहीं चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार पानी कब पीना चाहिए?

भोजन करते समय बीच-बीच में थोड़ा पानी पीना लाभदायक है, परंतु भोजन से पहले या तुरंत बाद अधिक पानी पीने से जठराग्नि मंद पड़ती है। व्यायाम के तुरंत बाद खाली पेट पानी नहीं पीना चाहिए।

किस प्रकार का पानी पीने से बचना चाहिए?

अशुद्ध, जूठा, बंद रखा हुआ, बासी या अत्यधिक ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। बीमारी में तथा शरद और वसंत ऋतु में उबालकर ठंडा किया हुआ पानी पीना स्वास्थ्यप्रद है।

किन परिस्थितियों में अधिक पानी नहीं पीना चाहिए?

सर्दी, बुखार, सूजन, जलोदर, अधिक पेशाब आना, या मंदाग्नि जैसी स्थितियों में अधिक पानी पीने से बचना चाहिए।

क्या सुबह उठते ही अधिक पानी पीना अच्छा है?

सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में पानी पीने से पेट साफ तो होता है, परंतु यह पाचक रसों को बहा सकता है और चर्बी-सूजन बढ़ा सकता है, इसलिए इसकी मात्रा पर ध्यान रखना आवश्यक है।

VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
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अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
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महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।

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