अर्जुन चूर्ण – हृदय, वजन और अस्थिभंग की आयुर्वेदिक औषधि

बनाने की विधि: अर्जुन के वृक्ष से या पंसारी की दुकान से अर्जुन (साजड़ या सादड़) की छाल लाकर उसे बारीक कूट लें और कपड़े से छानकर बारीक चूर्ण बना लें, फिर इसे एक साफ, सूखी बोतल में भरकर रख लें।

सेवन विधि: एक से दस ग्राम तक दिन में दो-तीन बार दूध के साथ लिया जा सकता है; इसे लेने का सबसे अच्छा तरीका खीर या दूधपाक (क्षीरपाक) के रूप में लेना है।

अर्जुन क्षीरपाक बनाने के लिए, एक कप दूध में उतना ही पानी मिलाएं, आवश्यकतानुसार चीनी डालें, और चम्मच से हिलाते हुए तब तक गरम करें जब तक पानी जल न जाए; फिर छानकर पी लें। यदि स्वाद पसंद न आए तो इसे शीरा, राब या किसी भी अन्य मीठे व्यंजन में मिलाकर लिया जा सकता है। इसमें उपयोग होने वाला दूध-घी गाय या बकरी का हो तो बेहतर है। चीनी की जगह मिश्री (साकर) का चूर्ण उपयोग करना भी हितकर है।

उपयोग:

(1) हृदयरोग – किसी भी प्रकार के हृदयरोग में अर्जुन को उत्तम औषधि माना गया है। इसका नियमित सेवन करते रहने से हृदयरोग नहीं होता। कोई भी व्यक्ति किसी भी ऋतु में इसका सेवन कर सकता है।

(2) मेदवृद्धि (चर्बी बढ़ना) – चर्बी घटाने के लिए रोज सुबह-शाम 1-1 चम्मच पानी के साथ लंबे समय तक लेते रहना चाहिए।

(3) अस्थिभंग (फ्रैक्चर) – हड्डी टूटी हो या फ्रैक्चर हुआ हो, तो इस चूर्ण का तिल के तेल के साथ लेप करना चाहिए।

नोट: अर्जुन रक्त को शुद्ध और बढ़ाने वाला भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अर्जुन चूर्ण किन रोगों में उपयोगी है?

हृदयरोग, अस्थिभंग (हड्डी टूटना) और मेदवृद्धि (चर्बी बढ़ना) के लिए अर्जुन चूर्ण एक प्रभावी औषधि माना जाता है।

अर्जुन चूर्ण कैसे लें?

एक से दस ग्राम तक दिन में दो-तीन बार दूध के साथ लिया जा सकता है; सबसे अच्छा तरीका इसे खीर या दूधपाक (क्षीरपाक) के रूप में लेना है।

हृदयरोग में अर्जुन चूर्ण कितना प्रभावी है?

किसी भी प्रकार के हृदयरोग में अर्जुन को उत्तम औषधि माना जाता है और इसका नियमित सेवन हृदयरोग को रोकने में सहायक है, लेकिन हृदयरोग के निदान और उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

अस्थिभंग (फ्रैक्चर) के लिए अर्जुन चूर्ण का उपयोग कैसे करें?

हड्डी टूटी होने पर अर्जुन चूर्ण को तिल के तेल के साथ लेप के रूप में लगाने की सलाह दी जाती है।

VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
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महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।

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