आमवात, संधिवात, रांझण (सायटिका), कटिशूल (कमर दर्द), आमपाचन तथा शरीर में वायु के कारण होने वाले शूल जैसे रोगों के लिए अजमोदादि चूर्ण एक अत्यंत प्रभावी औषधि माना जाता है।
बनाने की विधि: यह चूर्ण बनाने के लिए बाजार से निम्नलिखित औषधियां साबुत लाकर, साफ करके, कूटकर और चूर्ण बनाकर इस अनुपात में मिलाएं:
- अजमोद – 25 ग्राम
- काली मिर्च – 25 ग्राम
- लिंडीपीपर (पीपल) – 25 ग्राम
- वावडिंग – 25 ग्राम
- देवदार – 25 ग्राम
- चित्रक – 25 ग्राम
- सुवा (सोया के बीज) – 25 ग्राम
- सिंधव नमक – 25 ग्राम
- पीपरीमूल (गंठोड़ा) – 25 ग्राम
- हरड़े – 125 ग्राम
- सोंठ – 250 ग्राम
- वरधारो – 250 ग्राम
सेवन विधि: छना हुआ चूर्ण एक साफ कांच की बोतल में तीन महीने तक सुरक्षित रखें (तीन महीने बाद इसके गुण कम हो जाते हैं)। एक से दो ग्राम की मात्रा सुबह, शाम और रात को पानी के साथ लें।
उपयोग:
(1) आमवात – सुबह, शाम और रात को 1-1 चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ लें।
(2) संधिवात – दिन में दो-तीन बार 2-2 ग्राम चूर्ण पानी के साथ लें।
(3) रांझण (सायटिका) – दिन में तीन बार एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ लें।
(4) कटिशूल (कमर दर्द) – सुबह-शाम 1-1 चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ लें।
(5) शूल (दर्द) – शरीर के किसी भी अंग में दर्द होने पर उचित मात्रा में चूर्ण गरम पानी के साथ लें।
नोट: आयुर्वेदिक फार्मेसियों द्वारा बेचा जाने वाला यह चूर्ण अक्सर पुराना होने के कारण उतना प्रभावी नहीं रहता, इसीलिए कई वैद्य स्वयं ताजा औषधि बनाकर उपयोग करना पसंद करते हैं। यदि स्वयं बनाना संभव न हो, तो वैद्य से चूर्ण या इसकी तैयार टेबलेट भी ली जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अजमोदादि चूर्ण किन रोगों में उपयोगी है?
यह चूर्ण आमवात, संधिवात, रांझण (सायटिका), कटिशूल (कमर दर्द), आमपाचन और शरीर के दर्द जैसे वायु संबंधी रोगों में प्रभावी माना जाता है।
अजमोदादि चूर्ण कैसे लें?
आमवात में सुबह-शाम-रात 1 चम्मच गरम पानी के साथ, संधिवात में दिन में दो-तीन बार 2 ग्राम, तथा रांझण या कटिशूल में दिन में दो-तीन बार 1 चम्मच गरम पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है।
अजमोदादि चूर्ण किन चीजों से बनता है?
यह चूर्ण अजमोद, काली मिर्च, पीपल, वावडिंग, देवदार, चित्रक, सुवा, सिंधव नमक, पीपरीमूल, हरड़े, सोंठ और वरधारो जैसी औषधियों के मिश्रण से बनाया जाता है।
क्या बाजार में मिलने वाला तैयार चूर्ण भी उतना ही असरदार है?
फार्मेसियों द्वारा बेचा जाने वाला तैयार अजमोदादि चूर्ण अक्सर पुराना होने के कारण कम प्रभावी होता है, इसीलिए कई वैद्य इसे ताजा बनाना पसंद करते हैं; यदि यह संभव न हो, तो योग्य वैद्य से चूर्ण या टेबलेट लेना एक अच्छा विकल्प है।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
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