कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (9)

फोड़े (बॉइल्स) – नीम के सूखे पत्तों की राख बनाकर नीम के तेल में मिलाएं और फोड़ों पर बाहरी रूप से लगाएं। साथ ही नीम पत्तों का रस नियमित रूप से लें। गैस – शिवाक्षार पाचन चूर्ण वैद्य की सलाह के अनुसार भोजन के बाद दिन में दो बार लें। पेट फूलना – लहसुन को …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (8)

मुंहासे (एक्ने) – लोध्र, सूखा धनिया, सरसों और वचा को नीम पत्तों के रस के साथ पीसकर लेप बनाएं और दिन में चेहरे पर लगाएं। खुजली – प्रभावित हिस्से पर सरसों का तेल लगाएं और खट्टे भोजन का सेवन पूरी तरह बंद करें। आईबीएस (चिड़चिड़ी आंत) – सिर्फ छाछ लें और पंचामृत परपटी वैद्य की …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (7)

ल्यूकोडर्मा (त्वचा के सफेद दाग) – सभी प्रकार के त्वचा रोगों में महामंजिष्ठादि क्वाथ वैद्य की सलाह के अनुसार दिन में दो बार लें और खदिर (कत्था) चूर्ण का आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से उपयोग करें। हैज़ा (कॉलरा) – खूब नींबू का शरबत पीते रहें और संजीवनी वटी वैद्य की सलाह के अनुसार दिन …
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कुछ घरेलु नुस्खे – आयुर्वेद से (6)

कृमि (कीड़े) – मिठाई से परहेज़ करें और दिन में तीन बार शहद के साथ विडंग चूर्ण लें। कम वज़न – वैद्य की सलाह के अनुसार अश्वगंधा चूर्ण को वैद्य की सलाह के अनुसार दूध में शक्कर के साथ उबालकर रोज़ रात को पिएं। घेंघा (गॉइटर) – कांचनार गुग्गुल की वैद्य की सलाह के अनुसार …
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वातकंटक (एड़ी का दर्द) के लिए आयुर्वेदिक संपूर्ण मार्गदर्शिका | प्राकृतिक उपचार

English  ગુજરાતી बह बिस्तर से उतरकर जैसे ही पहला पैर जमीन पर रखते हैं और एड़ी में सुई भोंकने जैसी तीव्र पीड़ा होती है, उसे आयुर्वेद में ‘वातकंटक’ कहा जाता है। एड़ी का दर्द (Heel Pain) आजकल बहुत सामान्य समस्या बन गया है, विशेष रूप से उन लोगों में जो लंबे समय तक खड़े रहते …
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कैशोर गुग्गुलु: जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों के लिए आयुर्वेद का अमृत – संपूर्ण मार्गदर्शिका

मुख्य बातें कैशोर गुग्गुलु शुद्ध गुग्गुलु, त्रिफला, गिलोय और त्रिकटु वाला शास्त्रीय गोली रूप योग है। जोड़ों के दर्द, वातरक्त (गाउट), त्वचा रोग और न भरने वाले घाव में पारंपरिक रूप से उपयोग होता है। इसे अनुपान के साथ और वैद्य द्वारा बताई गई मात्रा में लिया जाता है। गाउट, यूरिक एसिड या त्वचा रोग …
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आयुर्वेद के अनुसार आहार की सही मात्रा क्या होनी चाहिए?

मुख्य बातें आयुर्वेद पेट का आधा भाग भोजन से, चौथाई पानी से भरने और चौथाई खाली रखने की सलाह देता है। दिन भर बार-बार खाने से पाचन बिगड़ता है और आम बनता है। दो भोजन के बीच लगभग तीन-चार घंटे का अंतर रखें, और पहला भोजन पचने के बाद ही खाएँ। भूख से थोड़ा कम, …
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न्यूराल्जिया (नाड़ी शूल / नाड़ी वेदना) – आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से

मुख्य बातें नाड़ीशूल (न्यूराल्जिया) का अर्थ है नस के मार्ग में तेज, चुभने वाला या जलन वाला दर्द। आधुनिक कारणों में नस का दबना, दाद (शिंगल्स), मधुमेह और चोट हैं; आयुर्वेद इसे मुख्यतः वात से जोड़ता है। ठंडा, रूखा, हल्का भोजन, वेग रोकना, तनाव और श्रम वात बढ़ाते हैं। चेहरे में अचानक तेज दर्द, कमजोरी …
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अजवाइन इतनी उपयोगी!

मुख्य बातें अजवाइन छोटा पर तीखे, कड़वे और उष्ण गुणों वाला रसोई का बीज है। गैस, पेट दर्द, सर्दी, गला बैठना, दाँत दर्द और कृमि में इसका पारंपरिक उपयोग है। छोटे बच्चों के लिए अजवाइन की पोटली तकिये के पास रखी जा सकती है, गले में कभी न बाँधें। पेट में तेज दर्द, साँस की …
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अजीर्ण (अपच) क्या है? कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

English ગુજરાતી अजीर्ण (Ajirna – Indigestion) आज के समय में अजीर्ण (अपच) होना एक बहुत ही सामान्य समस्या बन गई है। आधुनिक और शहरी जीवनशैली अजीर्ण का मुख्य कारण है। आज के युग में शारीरिक श्रम बहुत कम हो गया है, जबकि सुख-सुविधाओं में अत्यधिक वृद्धि हुई है। अनियमित दिनचर्या, भोजन के गलत समय और …
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