स्वाइन फ्लू से बचाव: आयुर्वेदिक सलाह और चिकित्सा

स्वाइन फ्लू से बचाव: आयुर्वेदिक सलाह और चिकित्सा

स्वाइन फ्लू से बचाव: आयुर्वेदिक सलाह और चिकित्सा

मुख्य बातें

  • स्वाइन फ्लू अन्य फ्लू की तरह फैलता है; हल्के मामलों में बुखार, खाँसी, गले में दर्द और शरीर दर्द होता है।
  • साँस फूलना, सीने में दर्द, BP गिरना या सुस्ती खतरे के संकेत हैं; तुरंत अस्पताल।
  • हल्का गरम भोजन, उबला पानी, आराम और खाँसते समय मुँह ढकना, हाथ धोना फैलाव रोकते हैं।
  • आयुर्वेदिक सावधानी सहायक है, पर लक्षण दिखने पर जाँच और उपचार का स्थान नहीं लेती।

हाल ही में हमारे देश के कुछ प्रांतों में महामारी की तरह फैले स्वाइन फ्लू से आप कुछ बातों का ध्यान रखकर स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षा दे सकते हैं।

  • स्वाइन फ्लू मूल रूप से फ्लू का ही एक बहुत तेज़ी से फैलने वाला और जानलेवा भी बन सकने वाला संक्रामक रोग है, इसलिए इस समय इसके विरुद्ध सावधानी रखना उतना ही आवश्यक है।
  • फ्लू के मूल लक्षणों में सर्दी-खांसी और बुखार मुख्य हैं, और हर वर्ष इस मौसम में सामान्य फ्लू तो होता ही है, लेकिन इस बार स्वाइन फ्लू का संक्रमण होने के कारण सतर्क रहना उतना ही आवश्यक है। इस रोग के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं, जिसमें शुरुआत में सिरदर्द, बेचैनी, बुखार, खांसी, गले में सूजन, सांस लेने में तकलीफ आदि शामिल हैं।
  • स्वाइन फ्लू को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश को भी समझना आवश्यक है, जिसमें स्वाइन फ्लू को A, B1, B2 और C इन चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

श्रेणी A: ऐसे रोगियों में सामान्य बुखार, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द, डायरिया, उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इन रोगियों को स्वाइन फ्लू टेस्टिंग की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें सभा-समारोह और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिए।

श्रेणी B1 और B2: ऐसे रोगियों में शरीर का तापमान 100.4 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में विशेष रूप से बच्चे, गर्भवती महिलाएं, वृद्ध नागरिक, अथवा हृदय, फेफड़े, लिवर, किडनी, डायबिटीज़ या एचआईवी की बीमारी से गुजर रहे रोगी, डॉक्टर की सलाह अनुसार टेमीफ्लू दवा की खुराक शुरू करके अपने घर में ही आइसोलेशन वार्ड तैयार कर उपचार ले सकते हैं। दिशा-निर्देश के अनुसार ऐसे रोगियों को भी स्वाइन फ्लू टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती।

श्रेणी C: जो रोगी श्रेणी C में आते हैं, उनमें सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, ब्लड प्रेशर कम होना, कफ में खून आना, नाखूनों का रंग बदलकर नीला पड़ जाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, ऐसे रोगियों के लिए स्वाइन फ्लू टेस्ट कराना अनिवार्य हो जाता है।

प्रतिकारात्मक उपाय (रोकथाम के उपाय)

1. आहार

  • सुपाच्य, ताज़ा, हल्का और गरम भोजन ही करें।
  • उबला हुआ पानी कफ-जन्य रोगों में लाभकारी होता है, इसलिए फिलहाल उसी का उपयोग करें।
  • मूंग, मूंग की दाल, खिचड़ी, दाल-चावल, लौकी, बैंगन, करेला, परवल की सब्ज़ी, बाजरे की रोटी जैसे गरम भोजन का समय पर सेवन करें।
  • मिठाई, चीज़, पनीर, डेयरी उत्पाद, ब्रेड, बिस्कुट, पाव, बाहर के नाश्ते, चिकनाई युक्त, रंग और परिरक्षक (प्रिज़र्वेटिव) युक्त भोजन, तथा मांसाहार आदि से यथासंभव बचें।
  • बासी भोजन और जंक फूड का पूर्णतः त्याग करें।

2. विहार (जीवनशैली)

  • छींकते या खांसते समय मुंह पर रूमाल रखें, संभव हो तो डिस्पोज़ेबल पेपर नैपकिन का उपयोग करें।
  • नाक, मुंह और आंखों को न छुएं, इससे रोगजनक विषाणु का आगे प्रसार रुकता है।
  • हाथों को बार-बार साबुन से धोएं, विशेष रूप से खांसी या छींक आने के बाद हाथ साफ करने के लिए अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र का भी उपयोग किया जा सकता है।
  • अनावश्यक यात्रा और भीड़भाड़ से दूर रहें, और ऐसी जगहों पर जाना हो तो मास्क पहनकर ही जाएं।
  • अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली से इस रोग से बचा जा सकता है।
  • अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
  • व्यसनों से दूर रहें और शराब पीने से बचें।
  • रोज़मर्रा की या घरेलू उपयोग की वस्तुओं या सतहों को छूने के बाद साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोएं।

3. धूप

किसी भी संक्रामक रोग में, और विशेष रूप से विषाणु-जनित रोगों में, होम-हवन-धूप वातावरण को शुद्ध करने का कार्य करता है, और ऐसे समय में घर में नियमित रूप से दिन में दो बार धूप करना आवश्यक है, जैसे:

  1. अष्टांग धूप आयुर्वेद द्वारा वर्णित श्रेष्ठ प्रकार का धूप है। इसमें गूगल के अतिरिक्त अगर, तगर, जटामांसी जैसे शुद्धिकारक, मंगलकारी औषध होते हैं जो वातावरण को शुद्ध करने का कार्य करते हैं।
  2. गूगल का धूप – कोयले पर गूगल और गाय का शुद्ध घी डालकर भी धूप किया जा सकता है।
  3. गाय के कंडे (छाणे), गाय का घी, दालचीनी, धनिया, तिल, चंदन, कपूर, जावित्री, कपूरकचरी, इलायची आदि से घर में हवन करके भी वातावरण शुद्ध किया जा सकता है, और अंत में गूगल का धूप करें।

4. सावधानियां

  • WHO के दिशा-निर्देश के अनुसार स्वाइन फ्लू के रोगी को आइसोलेशन रूम में रहकर ही उपचार लेना अनिवार्य है।
  • यदि आप बीमार हैं तो घर पर ही रहें।
  • संदिग्ध व्यक्ति को अलग कमरे में रखें।
  • बीमार, सर्दी-जुकाम या खांसी वाले व्यक्ति से दूरी बनाए रखें, अन्यथा इस रोग का संक्रमण लग सकता है।
  • संबंधित व्यक्तियों को जानकारी देते रहें और झूठी अफवाहों से दूर रहें।

5. प्रतिकारात्मक आयुर्वेदिक चिकित्सा

जिन्हें कोई लक्षण नहीं हैं, वे उपरोक्त सावधानियों के साथ-साथ:

  1. तुलसी के कुछ पत्ते और काली मिर्च चबाएं, अथवा उन्हें पीसकर शहद के साथ चाटें।
  2. गरम पानी में थोड़ी हल्दी मिलाकर सुबह पिएं।
  3. भारंग्यादि क्वाथ का काढ़ा या भारंग्यादि घनवटी वैद्य द्वारा बताई गई मात्रा में सुबह लें (बच्चों के लिए कम मात्रा)।
  4. चुटकीभर सोंठ डालकर उबाला हुआ दूध पिएं।
  5. सुदर्शन घनवटी वैद्य की सलाह के अनुसार सुबह लें।
  6. सितोपलादि चूर्ण वैद्य की सलाह के अनुसार शहद के साथ चाटें।
  7. छोटे बच्चों को आयुर्वेदिक कफ सिरप, बाल चतुर्भद्र सिरप, महामारी के दौरान नियमित रूप से दें।

यदि सर्दी-खांसी, बेचैनी हो या बार-बार कफ बनता हो, तो आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार शुरू करें, औषधियां आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही शुरू करें। इनमें व्योषादि वटी, सितोपलादि चूर्ण, लक्ष्मीविलास रस, भारंग्यादि घन, गुडुच्यादि घनवटी, हरिद्राखंड, त्रिभुवनकीर्ति रस, भागोत्तर रस, कफ सिरप आदि शामिल हैं, जो आवश्यक लगे वह चिकित्सक की सलाह अनुसार ही लें।

नोट: स्वाइन फ्लू की महामारी के दौरान इससे संबंधित और इसकी रोकथाम से संबंधित सभी परामर्श हमारे क्लिनिक में निःशुल्क है, और संबंधित स्वनिर्मित औषधियां 20% छूट पर उपलब्ध हैं।

स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण क्या हैं?

सिरदर्द, बेचैनी, बुखार, खांसी, गले में सूजन और सांस लेने में तकलीफ, ये लक्षण अचानक दिखाई देते हैं। गंभीर लक्षण (छाती में दर्द, ब्लड प्रेशर कम होना) दिखने पर तुरंत टेस्ट करवाना अनिवार्य है।

स्वाइन फ्लू से बचने के लिए आहार में क्या ध्यान रखें?

सुपाच्य, ताज़ा, हल्का और गरम भोजन करें, उबला हुआ पानी पिएं, और मिठाई, डेयरी उत्पाद, बेकरी वस्तुएं, बासी भोजन तथा जंक फूड से पूर्णतः बचें।

स्वाइन फ्लू के फैलाव को रोकने के लिए कौन सी सावधानियां रखें?

छींकते-खांसते समय मुंह पर रूमाल रखें, नाक-मुंह-आंखों को न छुएं, बार-बार हाथ धोएं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें, और संदिग्ध व्यक्ति को अलग कमरे में रखें।

स्वाइन फ्लू के विरुद्ध प्रतिकारात्मक आयुर्वेदिक उपाय क्या है?

बिना लक्षण वाला व्यक्ति सावधानी के साथ तुलसी के पत्ते-काली मिर्च शहद के साथ, हल्दी वाला गरम पानी/दूध, अथवा सितोपलादि चूर्ण जैसे उपाय ले सकता है, परंतु लक्षण दिखते ही तुरंत विशेषज्ञ आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनुसार ही उपचार शुरू करना चाहिए।

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वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
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अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
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महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।

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