- गिनी वर्म (नारू) – प्रभावित हिस्से पर पानी के साथ हींग लगाएं और गर्म पानी के साथ 1 ग्राम हींग दिन में दो बार लें।
- वायु से जुड़े सभी रोग – आयुर्वेद में वर्णित वायु (वात व्याधि) के सभी 80 प्रकार के रोगों में तिल के तेल में भुना हुआ लहसुन खाना चाहिए, और रूमेटॉइड आर्थ्राइटिस को छोड़कर इस तेल से मालिश भी की जा सकती है।
- बिछ्छू का फ़हर – घाव पर निर्मली (क्लियरिंग नट ट्री) का बीज लगाएं। बिछ्छू के डंक के बाद स्थिति गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें — यह उपाय प्राथमिक सहायता तक ही सीमित है।
- महिला बांझपन – शुद्ध नागकेसर को फलघृत के साथ 1 ग्राम दिन में दो बार लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
गिनी वर्म (नारू) के लिए घरेलू उपाय क्या है?
प्रभावित हिस्से पर पानी के साथ हींग लगाई जाती है और गर्म पानी के साथ 1 ग्राम हींग दिन में दो बार दी जाती है।
वायु से जुड़े रोगों के लिए क्या सलाह दी गई है?
तिल के तेल में भुना हुआ लहसुन खाने की सलाह दी जाती है, रूमेटॉइड आर्थ्राइटिस को छोड़कर इस तेल से मालिश भी की जा सकती है।
बिछ्छू के फ़हर के लिए घरेलू उपाय क्या है?
घाव पर निर्मली (क्लियरिंग नट ट्री) का बीज लगाया जाता है। डंक के बाद स्थिति गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
महिला बांझपन के लिए घरेलू उपाय क्या है?
शुद्ध नागकेसर को फलघृत के साथ 1 ग्राम दिन में दो बार लिया जाता है।
VN
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
आयुर्वेद कंसल्टेंट
अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
📍 क्लिनिक का Location — Google Maps
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
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Arattai:
Ayurveda
महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।