हर्ष और मीरा के दांपत्य में जल्दी स्खलन धीरे-धीरे केवल शारीरिक समस्या नहीं रहा। इसके साथ डर, शर्म, खामोशी और भावनात्मक दूरी जुड़ती गई। एक खुली बातचीत ने दोनों को समझाया कि समस्या के सामने एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ खड़ा होना जरूरी है।