अजीर्ण (अपच) क्या है? कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

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अजीर्ण (Ajirna – Indigestion)

आज के समय में अजीर्ण (अपच) होना एक बहुत ही सामान्य समस्या बन गई है। आधुनिक और शहरी जीवनशैली अजीर्ण का मुख्य कारण है। आज के युग में शारीरिक श्रम बहुत कम हो गया है, जबकि सुख-सुविधाओं में अत्यधिक वृद्धि हुई है। अनियमित दिनचर्या, भोजन के गलत समय और अनुचित आहार के कारण पाचन तंत्र अपनी स्वाभाविक कार्यक्षमता बनाए नहीं रख पाता। ऐसी स्थिति में पाचन अग्नि धीरे-धीरे मंद होने लगती है और परिणामस्वरूप अजीर्ण जैसी समस्या उत्पन्न होती है।

जब पाचन तंत्र पर उसकी क्षमता से अधिक भार पड़ता है, तब शरीर अजीर्ण के रूप में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआत में व्यक्ति को विशेष ध्यान नहीं जाता, लेकिन समय के साथ यह अपच के रूप में गंभीर हो जाता है। आयुर्वेद में अजीर्ण के लिए नियमित, सुव्यवस्थित और मूल कारणों पर आधारित उपचार उपलब्ध है, जिससे इस रोग से निश्चित रूप से मुक्ति पाई जा सकती है।

अजीर्ण होने के कारण

  • अत्यधिक पानी पीना
  • असमय या अनियमित समय पर भोजन करना
  • मल, मूत्र या वात के वेग को रोकना
  • अनियमित या अपर्याप्त नींद
  • कम खाना या अधिक खाना
  • समय पर भोजन न करना
  • कच्चा, जला हुआ या बासी भोजन करना
  • भूख लगने पर भी भोजन न करना
  • भूख न होने पर भी भोजन करना

ये सभी कारण पाचन अग्नि को कमजोर करते हैं और परिणामस्वरूप अजीर्ण यानी अपच होता है।

अजीर्ण के लक्षण

  • पेट में दर्द
  • पेट फूलना
  • बार-बार डकार आना
  • बेचैनी महसूस होना
  • हल्का बुखार रहना
  • कब्ज
  • गैस का न निकलना

आयुर्वेद के अनुसार अजीर्ण के प्रकार

आयुर्वेद में अजीर्ण के चार प्रकार बताए गए हैं, और प्रत्येक प्रकार के लिए अलग-अलग उपचार पद्धति वर्णित है:

  • आमाजीर्ण
  • विदग्धाजीर्ण
  • विष्टब्धाजीर्ण
  • रसशेषाजीर्ण

इन सभी प्रकारों में मंदाग्नि मुख्य कारण होती है। इसलिए पाचन अग्नि को प्रज्वलित करने वाली औषधियाँ अजीर्ण में विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होती हैं। सामान्य समस्या में घरेलू उपायों से स्वयं उपचार किया जा सकता है, लेकिन यदि रोग लंबे समय से हो, बहुत पुराना हो या लक्षण अधिक गंभीर हों, तो अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से उपचार लेना अत्यंत आवश्यक है। रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए विशेषज्ञ की सलाह से लिया गया उपचार अधिक लाभदायक होता है।

अजीर्ण में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • हींगाष्टक चूर्ण
  • लवणभास्कर चूर्ण
  • शंखवटी
  • तथा अन्य अनेक शास्त्रोक्त औषधियाँ

उचित औषधि संयोजन द्वारा अजीर्ण से पूर्ण राहत प्राप्त की जा सकती है।

अजीर्ण के लिए घरेलू उपाय

  • पके हुए अनानास के छोटे टुकड़ों पर काली मिर्च और सेंधा नमक छिड़ककर खाना।
  • नींबू को बीच से काटकर उसमें सेंधा नमक, सोंठ और थोड़ी हींग भरकर हल्का भूनें, ठंडा होने पर चूसें।
  • भोजन से पहले अदरक की स्लाइस पर सेंधा नमक, काली मिर्च और नींबू का रस लगाकर 10 मिनट पहले चबाएँ।
  • सोंठ और गुड़ या सोंठ और मिश्री लें।
  • लौंग और छोटी हरड़ का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा सेंधा नमक डालकर पिएँ।
  • धनिया और सोंठ का काढ़ा पिएँ, विशेषकर जब अजीर्ण के साथ हल्का बुखार हो।

पंचकर्म उपचार

पंचकर्म द्वारा शरीर की शुद्धि करके औषधियाँ लेने से उनका प्रभाव तेज़ और गहराई तक होता है:

  • वमन कर्म
  • विरेचन कर्म
  • इसके बाद लंघन कराना

पथ्य (लाभकारी आहार)

पाचन अग्नि को प्रज्वलित करने वाले हल्के और सुपाच्य पदार्थ लें:
पुरानी मूंग, लाल चावल, कोमल मूली, लहसुन, पुराना कद्दू, सहजन की फली, परवल, बैंगन, आँवला, संतरा, अनार, नींबू, शहद, मक्खन, घी, छाछ, नमक, दही, अदरक, हींग, अजवाइन, मेथी, धनिया, नागरवेल के पत्ते, उबला हुआ हल्का गर्म पानी तथा कड़वे, तीखे और खट्टे स्वाद वाले पदार्थ।

अपथ्य (त्याज्य आहार और आचरण)

  • मल, मूत्र और वात के वेग को न रोकें
  • अत्यधिक भोजन या बहुत कम भोजन
  • अनियमित भोजन
  • बाज़ार के नाश्ते और जंक फूड
  • बासी भोजन
  • विरुद्ध आहार
  • अरबी के पत्ते
  • रात को देर तक जागना

Frequently Asked Questions

Q1: अजीर्ण क्या है?

अजीर्ण एक पाचन विकार है जिसमें भोजन सही प्रकार से नहीं पचता।

Q2: बार-बार अपच क्यों होता है?

अनियमित भोजन, गलत आहार और मंदाग्नि इसके मुख्य कारण हैं।

Q3: अजीर्ण का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

औषधि, पथ्य-अपथ्य, घरेलू उपाय और पंचकर्म से उपचार किया जाता है।

Q4: क्या अजीर्ण पूरी तरह ठीक हो सकता है?

हाँ, सही कारण आधारित आयुर्वेदिक उपचार से अजीर्ण जड़ से ठीक हो सकता है।

Q5: अजीर्ण में कौन सा भोजन लाभदायक है?

हल्का, सुपाच्य और पाचन अग्नि बढ़ाने वाला भोजन लाभकारी होता है।


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बाज़ार के नाश्ते बंद करें और ताज़ा, हल्का भोजन लें। बहुत अधिक तीखा, खारा या खट्टा न खाएँ। अचार और बासी चीज़ों से परहेज़ करें।
यहाँ दी गई सलाह और दवाओं की जानकारी सामान्य मार्गदर्शन हेतु है।
बाज़ार में उपलब्ध आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता का प्रभाव उपचार के परिणामों पर पड़ सकता है।
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