हम गर्भनिरोध के लिए कंडोम का इस्तेमाल करते हैं, पर इसकी सुरक्षा को लेकर मन में हमेशा शंका रहती है। मेरा प्रश्न कंडोम की प्रभावशीलता और इसके फटने के कारणों के बारे में है।
एक-दो बार ऐसा हुआ कि संबंध के दौरान कंडोम फट गया था। उसके बाद कई दिनों तक गर्भ ठहर जाने की चिंता रही। अब हर बार मन में डर रहता है कि फिर ऐसा हुआ तो? इस डर के कारण संबंध में भी सहजता नहीं रहती।
मैंने सुना है कि कंडोम सौ प्रतिशत सुरक्षित नहीं है, पर कितने प्रतिशत सुरक्षित है यह नहीं पता। यह भी समझ नहीं आता कि यह क्यों फटता है: गलत साइज़, गलत तरीके से पहनना, पुराना कंडोम या कोई और कारण?
मुझे इन बातों पर मार्गदर्शन चाहिए:
– कंडोम गर्भ रोकने में कितना असरदार है?
– कंडोम फटने या फिसलने के मुख्य कारण क्या हैं?
– इसे सही तरीके से पहनने और संभालकर रखने का तरीका क्या है?
– कंडोम फट जाए तो तुरंत क्या करें, और कितने समय में?
– क्या कंडोम यौन संक्रमण से भी बचाता है?
– कंडोम के साथ कोई और उपाय रखना ज़रूरी है?
हम दोनों चाहते हैं कि गर्भनिरोध सुरक्षित भी रहे और संबंध में डर भी न रहे। इस बारे में स्पष्ट और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिलेगा तो हमें बहुत राहत होगी, और फिर ऐसी गलती नहीं होगी।
नमस्ते। कंडोम के बारे में सही जानकारी हो तो यह बहुत भरोसेमंद गर्भनिरोध बनता है।
सीधा उत्तर: सही तरीके से, हर बार और शुरुआत से अंत तक इस्तेमाल किया जाए तो कंडोम लगभग 98% असरदार है। रोज़मर्रा के इस्तेमाल में गलतियों के कारण यह असर लगभग 85-87% रहता है। ज़्यादातर कंडोम गलत तरीके, गलत साइज़, एक्सपायरी या गलत लुब्रिकेंट के कारण फटता है।
फटने के आम कारण
- एक्सपायरी डेट निकल गई हो, या बटुए में गर्मी में रखा हो।
- दांत या नाखून से पैकेट खोलना।
- सिरे की हवा दबाए बिना पहनना।
- गलत साइज़: बहुत टाइट फटता है, ढीला फिसल जाता है।
- तेल, वैसलीन या लोशन जैसे तेल आधारित पदार्थ लेटेक्स कंडोम के साथ इस्तेमाल करना।
- सूखापन और ज़्यादा घर्षण।
- एक साथ दो कंडोम पहनना।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद गर्भधारण के लिए सही समय और तैयारी पर ज़ोर देता है। बच्चे की योजना दंपति का अपना निर्णय है, और तब तक भरोसेमंद गर्भनिरोध इस्तेमाल करना समझदारी है। गर्भनिरोध के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
सही तरीका
- हर बार नया कंडोम, संबंध की शुरुआत से ही।
- पैकेट हाथ से धीरे से खोलें; सिरा दबाकर हवा निकालें और पहनें।
- पानी या सिलिकॉन आधारित लुब्रिकेंट इस्तेमाल करें।
- स्खलन के बाद इरेक्शन रहते हुए ही, कंडोम का निचला हिस्सा पकड़कर बाहर निकालें।
- ठंडी, सूखी जगह पर रखें।
फट जाए तो क्या करें?
- घबराए बिना, जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से इमरजेंसी गर्भनिरोध के बारे में पूछें; जितना जल्दी, उतना ज़्यादा असरदार।
- STI का जोखिम लगे तो जांच कराएं।
- मासिक देर से आए तो प्रेग्नेंसी टेस्ट करें।
औषधियों के बारे में
गर्भ रोकने के लिए कोई जड़ी-बूटी खुद न लें। इमरजेंसी गर्भनिरोध नियमित तरीका नहीं है; इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करें।
चेतावनी के संकेत: कब डॉक्टर से मिलें?
- कंडोम फटने के बाद इमरजेंसी गर्भनिरोध के लिए
- मासिक देर से आना
- लेटेक्स से खुजली, सूजन या दाने (एलर्जी)
- जननांग पर घाव या स्राव
किसे दिखाएं: गायनेकोलॉजिस्ट, सेक्सोलॉजिस्ट।
उदाहरण 1: एक दंपति में कंडोम बार-बार फटता था। बातचीत में पता चला कि वे साथ में नारियल तेल इस्तेमाल करते थे। पानी आधारित लुब्रिकेंट शुरू करने के बाद तकलीफ बंद हो गई।
उदाहरण 2: एक और दंपति कंडोम फटने के बाद अगले दिन डॉक्टर के पास गए और सही सलाह मिली। फिर उन्होंने कंडोम इस्तेमाल करने का सही तरीका भी सीखा।
संबंधित प्रश्न
दो कंडोम साथ पहनने से ज़्यादा सुरक्षा मिलती है?
नहीं, घर्षण से फटने का जोखिम बढ़ता है।
कंडोम के साथ नारियल तेल इस्तेमाल कर सकते हैं?
लेटेक्स कंडोम के साथ नहीं; पानी आधारित लुब्रिकेंट इस्तेमाल करें।
कंडोम STI से भी बचाता है?
हां, ज़्यादातर यौन संक्रमणों से काफ़ी सुरक्षा देता है, पर पूरी नहीं।
संक्षेप में: सही तरीके से हर बार इस्तेमाल किया जाए तो कंडोम लगभग 98% असरदार है। एक्सपायरी, गलत साइज़, हवा न निकालना और तेल आधारित लुब्रिकेंट फटने के मुख्य कारण हैं; फटे तो जल्दी डॉक्टर की सलाह लें।
आप इस बारे में निःसंकोच सलाह ले सकते हैं। आपकी जानकारी और consultation पूरी तरह गोपनीय रहेगी।
डॉ. निकुल पटेल (B.A.M.S.)
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